पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:साधु यदि धन से जुड़ा हो तो बहुत सजगता रखनी पड़ेगी
भक्ति के लिए जिन गतिविधियों की आवश्यकता बताई गई, उनमें शामिल हैं नियमित रहना, निरंतरता होना, सचेत होना, एकाग्रता बनाए रखना। तुलसीदास जी ने तो हनुमान चालीसा में लिखा है- नासै रोग हरै