घोड़ी नहीं आई तो पैदल बारात लेकर चले थे पारस:दुकान से शुरू हुआ सफर, मंत्री बनने के बाद भी नहीं छोड़ी सादगी; दोस्तों ने सुनाए किस्से
डिम्पल साप्ताहिक — विश्वसनीय हिंदी समाचार
पूरा पढ़ें